कीतना जानते है हम कुदरत के बारे में
आज कल कही भी गावों को छोड़ के हम शहर वाले लोग कुदरत से इतने दूर है। के हम सब बनावटी हो चुके है
आज कल बछो के लिए कंप्यूटर,टीवी , वीडीओ गेम और ऐसे चीजे जो टेक्नोलॉजी के साथ है उसी से जुड़े है माँ बाप भी उन्हें कुदरत से दूर रखते है क्यो की वहां जाने के लीये उन्हें टाइम निकलना पड़ता है जो नही है इंसान मशीन बन चुका है और अपने बछो को भी वही बन्ने के लीये तेयार कर रहा है आज कल की औरते भी करियर बनने में लगी है
बछो की सिक्षा पढ़ाई से लगी है इतने मार्क्स आने चाहीये चाहे बच्चो का बचपन छीन जाए बच्चे समय से पहले बड़े हो जाए और कोई भी मज़ा जीवन का जो सही मैंने में है वो न ले पाए
और अगले कुछ साल बाद अपने माँ बाप की तरह ही मशीन बन के बाज़ार में काम करने आ जाए जो अच्छे मार्क्स वाला मशीन है
आज कल अगर आप किसी माँ बाप से पूछो गे के आपका बच्चा कुदरत के बारे में क्या जनता है कीतना रहा है कुदरत के साथ तो जवाब होगा हम तो उसे tracking पे भेजते है।
tracking ये शब्द सुना है। हा हर कीस्म की सुविधा ओ के साथ कुदरत में रहने की व्यवस्था जहाँ आप सीर्फ और सीर्फ कुदरत के बारे में जान सकते हो उसे महेसुस नही कर सकते
समाज नही सकते
एक दीन की बात है में ट्रेन से जा रहा था दो बच्चे बारिस के पानी से ऐसे इतरा रहे थे जेसे गन्दा पानी हो
में ये नही कहेता में बहोत बड़ी आगे का हू लेकिन आज से १० साल पहले भियो बच्चे बारिस में नहाना पसंद करते थे।
आज कल लोग उससे भी दूर भाग रहे है
उपरवाले का सुकर है अभी हमारे यहाँ कुदरत है
अगर इसे नही संभाला और बच्चो को हमने इससे दूर रखा
तो एक दीन शायद वो लोग हमेशा के लीये मशीन बन के और मशीनो में दब के रह जायेंगे न पानी मिलेगा न पेड़ हवा भी बनावटी लेनी पड़ेगी
कुदरत के साथ रहो और कुदरत को अपनाओ बच्चो को जोडो कुदरत के साथ
बनाओ हमारा जहाँ और सुंदर और जीने के लायक
धन्यवाद
Saturday, June 21, 2008
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2 comments:
अच्छी बातें. लिखते रहिये. बहुत ही अच्छा लेख. आगे भी उम्मीद है. शुक्रिया व् शुभकामनायें.
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उल्टा तीर
हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है. नियमित लेखन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाऐं.
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