Friday, April 24, 2009

भारतीय संविधान

भारत हमारा प्यारा देश जिस में हर पाँच साल में चुनाव होते है और हम हमारे प्रधान मंत्री देश के लिए एवम मुख्या मंत्री राज्य के लिए चुनते है । जो दुनिया का सबसे बड़ा प्रजा तंत्र कहलाता है ।
लेकिन क्या ये सच में प्रजा तंत्र है । या पार्टी तंत्र है पार्टी मानी जो भी पॉलिटिकल पार्टी है वो क्यो की
मेरे अनुसार मेरे मत विस्तार में एक भी नेता ऐसा नही है जिसे पार्टी के अलावा कोई भी पसंद करता हो
एक तो सबसे बड़ा घपला कर के बेथ ने वाला जो जेल में भी रह चुका है & दुसरे को जिस सीट पे वो खड़ा है वहा के ९० % लोग नही जान ते उस आदमी के बारे में सिर्फ़ पार्टी ही जानती होंगी
अपक्ष में खड़े लोग जिनको अपने मोहल्ले या सोसायटी के अलावा थोड़े बहोत लोग यानि के वो भी टोटल एरिया के १० % वो भी सायद में ज्यादा बोल रहा हू
अब आप बोलिए इस सब में प्रजा तंत्र कहा से आया । हुआ न पार्टी तंत्र जो एक प्रजा तंत्र के २ % से भी कम लोग तय करते है । और सब लोग उसमे हम जेसे पढ़े लिखे भी आ गए
जो कुछ नही बोल पाते या बोलना नही चाहते । और ऐसे आदमी को अपने एरिया में इलेक्ट होके आने देते है
जिसके बारे में सब जानते है के ये अपना और अपनी पार्टी के अलावा किसी का भला नही करने वाला
ये सिर्फ़ मेरे इलाके की बात नही है मुझे यकीं है के भारत में हर इलाके में यही हाल है ।
कल ही कही पे पढ़ा के हमारे संविधान में मंत्री लोगो की कोई भी जवाबदारी नही लिखी गई ।
संविधान में निचले तबक्के की भलाई के लिए बहोत सारे प्राविधान बनाये गए । जिसका फायदा तो हुआ लेकिन ऊँचे तबक्के के लोगो को ।
आज सविधान में बहोत सारे बदलावों की झरूरत है जिसमे ये प्राविधान होना चाहिए के हर मंत्री की एक जिम्मेदारी लिखी होनी चाहिए दलित और सरे वर्ग एक सामान होने चाहिए कोई स्पेशल ताबक्का नही
लेकिन हाँ सिर्फ़ दलितों में पिछडे वर्ग नहिहाई इस अनामत की वजह से जो ऊँची जाती के लोग भी पिछडे हुए हो गए है उनको भी आगे लाने की बात होनी चाहिए
और हा भारत को संपूर्ण बिन सांप्रदायिक देश ghoshit करना चाहिए और ऐसे सख्त कानून बनने चाहिए धर्म के नाम पे कोई भी काम आप के घर के बाहर नही होना चाहिए कोई साधू महात्मा लोगो को भ्रमित नही करना चाहिए कोई भी मौलवी फतवा निकल के अपनी मन मानी धर्म के नाम पे नही चलाना चाहिए कोई भी नेता किसी भी वर्ग या धर्म को बांटने की कोशिश करे तो उसके नेता गिरी पे हमेशा के लिए प्रतिबन्ध होना चाहिए
बस एक ही बात होनी चाहिए देश देश का विकास और देश की सुरक्षा
और हाँ बहोत सारे कानूनों में बदलाव
जिससे कोई भी इंसान कानून को ना तोड़ पाए और नही ग़लत फायदा उठा पाए मन्दिर मस्जिद और कोई भी धरम स्थान के लिए कमिटी बननी चाहिए जिस में हर धर्म के ऐसे लोग जो कट्टर नही है। जो पढ़े लिखे लोग हो और जो हर धर्म का अभ्यास कर चुके हो और बारीकियों को समजते हो जो ये न मने के मेरा ही धर्म सबसे ऊपर हो
जहा हर इंसान के लिए शिक्षा जरूरी हो स्कूल में पढ़ाई के अलावा स्पोर्ट्स और बहोत सी चीजे जो बच्चे की जिंदगी में आगे चल के काम आए होना चाहिए कोई भी स्कूल भी किसी धर्म की नही होनी चाहिए
और सबसे बड़ा चंगे हमारे देश के शिक्षा मंत्रालय में आना चाहिए Jahan मंत्री की एक disha निर्देश होने चाहिए जिसे शिक्षा का ज्ञान हो जो समजता हो सहिक्षा क्या है और क्या होनी चाहिए
और बहोत कुछ है
अभी समय की कमी होने से बस इतना ही आगे आप के sahyog से likhna chahunga
आशा है आप से isame कुछ mashawara मिले और अपनी rai bhejiye और मुझे प्रेरित कीजिये अगर में अच्छा लिख paun
जय hind .

Tuesday, February 24, 2009

हिंदुस्तान के लोगो यहाँ हिंदुस्तान के लोग यानि की हिन्दुस्तानी
ना हिंदू ना ही मुसलमान ,अगर हिंदुस्तान में ये चालू हो गया तो भागवान भी नही बचा पायेगा इसे
यहाँ मुझे किसी और धर्म के बारे में बोलने का अधिकार नही है में उसी धर्म की बात करूँगा जिसमे में पैदा हुआ हू और जिस के संस्कारों में में बड़ा हुआ हू और मुझे ये जूठे हिंदुत्व के दावे करने वालों से ज्यादा गर्व है के में हिंदू हू और हिंदुस्तान में जन्म लिया है । लेकिन में इन लोगो के साथ सहमत नही हू जिन्होंने मालेगाव में विस्फोट किए
या जो गोधराकांड करवाया या राम मन्दिर बनने की तरफ़ है । या हिंदू संस्कृति के नाम पर गरीब लोगो को भड़का के अपना उल्लू सीधा करना चाहते है । बंगलोर , मुंबई में आए दिन होता रहता है ,गुजरात में कई बार हुआ है
अब हिंदू संस्कृति की ही बात करे । तो दुनिया में सबसे पुराना धर्म जिसे ये लोग संस्कृति के नाम पर बदनाम कर रहे है । अगर हम महाभारत और रामायण को मानते है तो ये बाते कभी नही आती के वेलेंतिने या pub धर्म विरोधी है क्यो की जिन्हों ने भी इसे समजा है हमारे प्रिय पत्रों को छोड़ के सब उस समय से ही भोग विलास में मस्त थे यानि की १०००० साल पहले या उससे भी पहले हमारे यहाँ प्यार करना या लव मर्रिएगे उससे भी पुराणी बात है शराब शबाब ये सब भारतीय संस्कृती का तब से हिस्स्सा है जब दुनिया में कोई और संस्कृति मेरे ख्याल से आई भी नही थी
और हिंदू संस्कृति जों हजारो सालो से चली आ रही है उसे ख़तम करने कितने लोग आए आज तक ये खड़ी है और हमेशा रहेगी लेकिन अगर ये लोग जों बदनाम कर रहे है ये बदनाम न करे तो हिंदू संस्कृति कई गरिमा और मान मर्यादा बनी रहेगी हमारी संस्कृति जों हमेसा प्रेम भावः रखना सिखाती है और पुरी दुनिया में जों एक सब से पुराणी और अहिन्षा में मानने वाली और लोगो को वही राह दिक्लाने वाली संस्कृति को ये लोग ऐसे बदनाम कर रहे है जेसे मुसलिम धर्म कुछ कट्टर पंथी ओ की वजह से हो गया है ।
जेसे आज दुनिया के ज्यादातर लोग मुस्लिम धर्म के लोगो को एक शंका भरी नज़र से देखते है
मुझे डर है ये हिंदू धर्म के कहने वाले सुभ चिन्तक दुनिया में हिंदू लोगो के लिए ये खतरा खड़ा न करे
और हर हिंदू से में एक बात कहेना चाहूँगा हमारा धर्म इस लिए महँ नही है के ये सबसे पुराना है हमारा धर्म इस लिए महँ है के इसमे किसी के लिए नफरत की भावना नही है । और जों हिंदुत्व के नाम पे नफरत करना सिखा रहे है । वो कदापि हिंदू नही है । हिंदू धर्म में लड़के लड़कियों को सामान आज़ादी पहले से है । सुभद्रा जी कृष्ण के साथ भाग के नही जाती सीता माता के लिए अपनी पसंद का वर नही धुन्द्ते या फ़िर द्रौपदी ये तो बहोत कम उदहारण है इससे लम्बी यादी बन सकती है । और हिंदू धर्म के लिए खतरा है लेकिन ये लोग जों हिंदू है और बदनाम कर रहे है वरना बहार के लोगो से कोई खतरा नही है
और हा आज झरूरत है हिंदू धर्म में रहे सडे को ख़तम कर ने की और हिंदुस्तान में रहे सडे को ख़तम करने की ये pub या वैलेंटाइन डे कोई खतरा या हिंदू संस्कृति पे हुम्ला नही है क्यो की हिंदुस्तान में तो प्यार की रात हुआ करती है हजारो सालो से जिसके बारे में कभी और लिखूंगा

ये लेख आप को केसा लगा कृपया मुझे लिखे और भाषा में कोई भूल हो तो माफ़ कर दे
जय हिंद

Sunday, December 7, 2008

हम और आतंकवाद


भारत देश जहा धर्म और जाती के नाम पे हजारो सालो से लोग सब कुछ सहते आ रहे है। पहले के ज़माने में लोगो को जाती के आधार पर बात दिया जाता था। जहाँ पे गावों में भी लोग केसे रहते थे ये जो आज से १५ साल पहले की लाइफ देखते और तब समजते थे उन्हें मालूम ही है आज कल की नई जनरेशन नया ड्रामा देख रही है
जिन्हें नही मालूम तब ब्रह्मं के अलग घर ( एरिया ) हुआ करते थे, राजपूत अलग , और दलित लोग गावों के बहार रहा करते थे जिन्हें गावों में सिर्फ़ साफ़ सफाई के लिए बुलाया जाता था। यानि नौकरी लेकिन किसी भी घर की रसोई में उन्हें स्थान नही था । अगर गों में शादी होती सब को बुलाते अच्छे से बिठा के खिलते लेकिन दलितों को खाना फेंक के देते के उन्हें छु जायेंगे तो अच्छुत हो जायेंगे आज भी वो हालत है कई गों में
और ज्यादातर लोग इसे जान के अनजान बनते है ।
पहेले ब्राहमीन जब लोगो को जाट पात के नाम से बांधते थे तब भी हमारे नपुंशक पोलितिसियन यानि राज कारिणी लोग( तब के राजा ) अपनी आँखे बाँध रखते थे कही पाप न लग जाए ये सोच कर लेकिन तब वो धर्म से डरते थे और भगवान से

आज का नेता हमारे मंत्री जी कोई जात पात नही है कह के आने वाले अपनी खुरशी के अलावा किसी से भी प्यार नही करते भगवान तो जेसे इस दुनिया में उनके लिए अस्तित्व में ही नही है जिन से डरना क्या धर्म सत्ता में आने की सीडी है
एक बार आ गए फ़िर धर्म लोगो को लड़ने में और बाँटने में उसे होता है
ये आतंकवाद भी यही हमारे नेता का खड़ा किया हुआ पाप है हर इलाके में छोटे तबके के लोगो पे जो अत्याचार हुए और अपने खुरशी के चक्कर में इन्होने जो चलाया और जहाँ जहाँ लोगो को अत्याचार के खिलाफ खड़ा होने को नही मिला उन्हों ने जाके देश के गद्दारों से हाथ मिला लिया सिर्फ़ पाकिस्तान या चाइना ही हमारा दुसमन नही है या ये बहार से आने वाले ही आतंकवादी नही है
हमारे अन्दर नक्शाल्वाद भी बहोत बड़ा चिंता का विषय है और कोई भी सरकार आ जाए उस एरिया में कुछ नही करेगी वहा की कुछ लॉबी को फायदा कराने के चक्कर में
अगर कोई भी सरकार थोड़ा वहा ध्यान दे और वहा ठीक विकास करे किसी को देश के खिलाफ खड़ा नही रहना है ।
हम सब भी बहोत बड़े भागीदार है इन सब में आज न में न आप हिंदू या मुस्लिम एक दुसरे को शंका की नज़र से देखते है अरे भाई हम सब यही रहते है और एक दुसरे के साथ ही है कुछ लोगो के कहने से अलग नही होने वाले
इस आतंकवाद से लड़ने के लिए कोई सरकार अब कुछ नही कर सकती क्यो की ये एक ऐसा राक्षश जाग चुका है जिसे हर बार खाने के इंसान चाहिए और इसे मरने अब कोई बड़े चमत्कार की ही आशा है
कीप की दुनिया का कोई भी देश इससे अछूता नही है और ना ही रह पायेगा या कोई भी देश ये नही कह सकता हम सुरक्षित है ।
हमारे इंटेलिजेंस पे सवाल उठे
कोई भी आदमी अगर अपने को मार के भी कुछ करना चाहे तो उसे रोकना मुश्किल हो जाता है यहाँ तो ऐसी फौज है
और वो अकेले हो तो शायद मालूम भी पड़े यहाँ तो हमारे अपने हमारे बिच से ही उन्हें मदद करते है
तब तो पकड़ना मुश्किल हो जाता है और जेसे मदद मिली है मुझे नही लगता कोई छोटे आदमी से मदद मिली होगी और वो जनता भी है अपने को केसे बहार रखना है ।
हमारे जांबाज़ मरेनेगे और ये लोग अपना खेल खेलते रहेंगे
जिन्हें हम चुन के लाये है
सो हम और आतंकवाद एक ही बात है । हम ने ही उस नेता को खड़ा किया और उसी ने आतंकवाद को
अब बोलो कौन रोक पायेगा इसे ?
कोई जवाब देगा ????????????

Saturday, June 21, 2008

कुदरत

कीतना जानते है हम कुदरत के बारे में
आज कल कही भी गावों को छोड़ के हम शहर वाले लोग कुदरत से इतने दूर है। के हम सब बनावटी हो चुके है
आज कल बछो के लिए कंप्यूटर,टीवी , वीडीओ गेम और ऐसे चीजे जो टेक्नोलॉजी के साथ है उसी से जुड़े है माँ बाप भी उन्हें कुदरत से दूर रखते है क्यो की वहां जाने के लीये उन्हें टाइम निकलना पड़ता है जो नही है इंसान मशीन बन चुका है और अपने बछो को भी वही बन्ने के लीये तेयार कर रहा है आज कल की औरते भी करियर बनने में लगी है
बछो की सिक्षा पढ़ाई से लगी है इतने मार्क्स आने चाहीये चाहे बच्चो का बचपन छीन जाए बच्चे समय से पहले बड़े हो जाए और कोई भी मज़ा जीवन का जो सही मैंने में है वो न ले पाए
और अगले कुछ साल बाद अपने माँ बाप की तरह ही मशीन बन के बाज़ार में काम करने आ जाए जो अच्छे मार्क्स वाला मशीन है
आज कल अगर आप किसी माँ बाप से पूछो गे के आपका बच्चा कुदरत के बारे में क्या जनता है कीतना रहा है कुदरत के साथ तो जवाब होगा हम तो उसे tracking पे भेजते है।
tracking ये शब्द सुना है। हा हर कीस्म की सुविधा ओ के साथ कुदरत में रहने की व्यवस्था जहाँ आप सीर्फ और सीर्फ कुदरत के बारे में जान सकते हो उसे महेसुस नही कर सकते
समाज नही सकते
एक दीन की बात है में ट्रेन से जा रहा था दो बच्चे बारिस के पानी से ऐसे इतरा रहे थे जेसे गन्दा पानी हो
में ये नही कहेता में बहोत बड़ी आगे का हू लेकिन आज से १० साल पहले भियो बच्चे बारिस में नहाना पसंद करते थे।
आज कल लोग उससे भी दूर भाग रहे है
उपरवाले का सुकर है अभी हमारे यहाँ कुदरत है
अगर इसे नही संभाला और बच्चो को हमने इससे दूर रखा
तो एक दीन शायद वो लोग हमेशा के लीये मशीन बन के और मशीनो में दब के रह जायेंगे न पानी मिलेगा न पेड़ हवा भी बनावटी लेनी पड़ेगी
कुदरत के साथ रहो और कुदरत को अपनाओ बच्चो को जोडो कुदरत के साथ
बनाओ हमारा जहाँ और सुंदर और जीने के लायक
धन्यवाद

Wednesday, June 18, 2008

FILM INDUSTRY

Indian film industry is biggest in this world who produce maximum movie per year & spend million of $ in a year for movie making
but we have to say this with heavy heart that no any production UNIT also try to bring original stories
biggest production houses like yash raj, rakesh roshan & many otheres
they are very powerful person in the industry who can support & encourage the originality but
they now work for money oriented only
who ever go with money
they produce their films which is really a bad thing
they are most powerful part of industry & now they have to start encourage the real talent
not to support only who have money
cause real talent always run short of money which is really a bad things

& so many film makers in our industry i don't think have to mention the name here but
its really a poor thing for India that they are also
doing Ctr. C & ctr. V
which is ridicules thing for India
& last year was good when some film makers try to make original films & they were success also its shown that some one have to take a start for that
all film script writers have to have few seminar
they have to think towards original material what ever other ask but if you give original india will have great future in film industry


Thursday, August 2, 2007

bachpan

friends
( Bachpan) is childhood in Hindi
in India bachpan was different & now a days it is different
the way people live & living style are changed now a days
before 10 years
children s were connected with nature & natural things they use to go for bicycling for tracking for the things which they enjoy out side they were connected with nature in them life
during school they play a lot with study also & without extra burden they studied the best
but now in a competitive world & by being parents much busy in earning they don't have time for child & in city & town life they are far away from nature
now
they feel by plant a few small plants they are with nature
ones in a year they send them child to tracking which are just being in some open area they think that is nature but
it is sad that people forget the things with nature
once the time was there
when children's were enjoying the way they go school by walk by bicycle & by doing some exercise but now autos ,buses,cars & bikes
you can imagine how much life has changed
they go for travel to see different countries but they don't know them city they go in mall & restaurant but they don't know what is jungle(forest) what is river's (now you cant find that river too) they don't know Indian food but they know pizza,pastas & foreign junk food & cold drinks but they are far away from Indian culture they are good in study
but far from general knowledge
when i was studding at that time there was a less different in between rich & poor child in school now both in different school