Sunday, December 7, 2008
हम और आतंकवाद
भारत देश जहा धर्म और जाती के नाम पे हजारो सालो से लोग सब कुछ सहते आ रहे है। पहले के ज़माने में लोगो को जाती के आधार पर बात दिया जाता था। जहाँ पे गावों में भी लोग केसे रहते थे ये जो आज से १५ साल पहले की लाइफ देखते और तब समजते थे उन्हें मालूम ही है आज कल की नई जनरेशन नया ड्रामा देख रही है
जिन्हें नही मालूम तब ब्रह्मं के अलग घर ( एरिया ) हुआ करते थे, राजपूत अलग , और दलित लोग गावों के बहार रहा करते थे जिन्हें गावों में सिर्फ़ साफ़ सफाई के लिए बुलाया जाता था। यानि नौकरी लेकिन किसी भी घर की रसोई में उन्हें स्थान नही था । अगर गों में शादी होती सब को बुलाते अच्छे से बिठा के खिलते लेकिन दलितों को खाना फेंक के देते के उन्हें छु जायेंगे तो अच्छुत हो जायेंगे आज भी वो हालत है कई गों में
और ज्यादातर लोग इसे जान के अनजान बनते है ।
पहेले ब्राहमीन जब लोगो को जाट पात के नाम से बांधते थे तब भी हमारे नपुंशक पोलितिसियन यानि राज कारिणी लोग( तब के राजा ) अपनी आँखे बाँध रखते थे कही पाप न लग जाए ये सोच कर लेकिन तब वो धर्म से डरते थे और भगवान से
आज का नेता हमारे मंत्री जी कोई जात पात नही है कह के आने वाले अपनी खुरशी के अलावा किसी से भी प्यार नही करते भगवान तो जेसे इस दुनिया में उनके लिए अस्तित्व में ही नही है जिन से डरना क्या धर्म सत्ता में आने की सीडी है
एक बार आ गए फ़िर धर्म लोगो को लड़ने में और बाँटने में उसे होता है
ये आतंकवाद भी यही हमारे नेता का खड़ा किया हुआ पाप है हर इलाके में छोटे तबके के लोगो पे जो अत्याचार हुए और अपने खुरशी के चक्कर में इन्होने जो चलाया और जहाँ जहाँ लोगो को अत्याचार के खिलाफ खड़ा होने को नही मिला उन्हों ने जाके देश के गद्दारों से हाथ मिला लिया सिर्फ़ पाकिस्तान या चाइना ही हमारा दुसमन नही है या ये बहार से आने वाले ही आतंकवादी नही है
हमारे अन्दर नक्शाल्वाद भी बहोत बड़ा चिंता का विषय है और कोई भी सरकार आ जाए उस एरिया में कुछ नही करेगी वहा की कुछ लॉबी को फायदा कराने के चक्कर में
अगर कोई भी सरकार थोड़ा वहा ध्यान दे और वहा ठीक विकास करे किसी को देश के खिलाफ खड़ा नही रहना है ।
हम सब भी बहोत बड़े भागीदार है इन सब में आज न में न आप हिंदू या मुस्लिम एक दुसरे को शंका की नज़र से देखते है अरे भाई हम सब यही रहते है और एक दुसरे के साथ ही है कुछ लोगो के कहने से अलग नही होने वाले
इस आतंकवाद से लड़ने के लिए कोई सरकार अब कुछ नही कर सकती क्यो की ये एक ऐसा राक्षश जाग चुका है जिसे हर बार खाने के इंसान चाहिए और इसे मरने अब कोई बड़े चमत्कार की ही आशा है
कीप की दुनिया का कोई भी देश इससे अछूता नही है और ना ही रह पायेगा या कोई भी देश ये नही कह सकता हम सुरक्षित है ।
हमारे इंटेलिजेंस पे सवाल उठे
कोई भी आदमी अगर अपने को मार के भी कुछ करना चाहे तो उसे रोकना मुश्किल हो जाता है यहाँ तो ऐसी फौज है
और वो अकेले हो तो शायद मालूम भी पड़े यहाँ तो हमारे अपने हमारे बिच से ही उन्हें मदद करते है
तब तो पकड़ना मुश्किल हो जाता है और जेसे मदद मिली है मुझे नही लगता कोई छोटे आदमी से मदद मिली होगी और वो जनता भी है अपने को केसे बहार रखना है ।
हमारे जांबाज़ मरेनेगे और ये लोग अपना खेल खेलते रहेंगे
जिन्हें हम चुन के लाये है
सो हम और आतंकवाद एक ही बात है । हम ने ही उस नेता को खड़ा किया और उसी ने आतंकवाद को
अब बोलो कौन रोक पायेगा इसे ?
कोई जवाब देगा ????????????
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